लोगों को अब कैश का नहीं बल्कि चुनाव का इंतजार

Feature_14-June-2015_M

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने एक बयान जारी कर कहा कि बैंकों और एटीएम के सामने लाईनों में लगे लोगों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। गुस्से से भरे लोगों को अब कैश का नहीं बल्कि चुनाव का इंतजार है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि नोटबंदी का फैसला लागू हुए एक माह से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन हालात सुधरने के बजाए और भी ज्यादा बदतर हो गये हैं। नौकरीपेशा, किसान, मजदूर और व्यापारी अपना-अपना काम छोड़कर बैंकों और एटीएम के सामने अपने पैसे निकालने के लिए लाईनों में लगे हैं। लाखों दिहाड़ी मजदूर काम ना मिलने के कारण बेरोजगार हो चुके हैं। हजारों की तादाद में मजदूर शहरों में काम ना मिलने के कारण अपने-अपने गांव लौट चुके हैं लेकिन उन्हें गांव में भी कोई रोजगार नहीं मिल रहा है क्योंकि गांव में तो खेती तक के लिए किसानों के पास पैसे ही नहीं है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 30 दिसंबर तक का वक्त मांगा था, अब 22 दिन बचे हैं। पूरे देश सहित उत्तर प्रदेश में हर जगह कैश की किल्लत बरकरार है। एक महीने बाद भी बैंक शाखाओं तथा एटीएम के आगे कतारें कम नहीं हो रही हैं। लोग अपने वेतन का पैसा पाने के लिये अब भी घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। नकदी की कमी से जूझ रहे बैंकों ने कैश निकासी के लिये स्वयं से सीमा लगायी है। इसके तहत कुछ मामलों में ग्राहकों को 2,000 रुपये तक ही निकालने की अनुमति दी जा रही है जबकि रिजर्व बैंक ने प्रति सप्ताह 24,000 रूपये की सीमा तय की हुई है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का भविष्य में चाहे कोई भी असर पड़े लेकिन वर्तमान में तो सारी व्यवस्था ही बिगड़ चुकी है। हर आदमी परेशान हैं। लोगों की छोटी-छोटी जरुरतें भी पूरी नहीं हो रही हैं। दूध वाले, अखबार बांटने वाले हाकर, मोची, धोबी, नाई, रेहड़ी-पटरी पर फल व सब्जी बेचने वाले आदि सभी का काम ठप्प हो गया है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि नोटबंदी ने सभी काम धंधे चौपट कर दिए हैं। नोटबंदी के बाद से ही व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे नजर आ रहे हैं। लोगों यह भी मानने लगे हैं कि नोटबंदी के बाद प्रोपर्टी के कार्य में लगे लोग बेरोजगार हो गये हैं। अब तक खरीदारी बंद ही नजर रही है। वहीं अन्य कारोबार भी मंदे होने के कारण कई मालिक अपने स्टाफ को कम करने पर भी विचार करने लगे हैं। लोगों खासकर युवाओं को नोकरी की चिंता सताने लगी है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि नोटबंदी से सरकारी कर्मचारी काफी परेशान हो रहे हैं। अधिकांश सरकारी कर्मचारियों की प्रति माह करीब 30 हजार रुपए से अधिक सैलेरी है। सैलेरी बैंकों में जमा हो चुकी है, लेकिन एक साथ इन रुपयों को बैंक से नहीं निकालने से भारी परेशानी बनी हुई है। हालात यह है कि वे एक-एक, दो-दो हजार रुपए के लिए बैंकों से लेकर एटीएम के बाहर, अंदर घंटों लाईनों में खडे रहते हैं। यहां मिलने वाले दो हजार रुपए से वे महीने भर के आवश्यक सामानों की खरीदरी नहीं कर पा रहे हैं।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि नोटबंदी के फैसले से किसान और ग्रामीण इलाकों में लोग काफी परेशान हो रहे हैं। नगदी की कमी के कारण किसानों की फसल नहीं बिक पा रही है और वे बीज और खाद नहीं खरीद पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 8 नवंबर के बाद रिजर्व बैंक द्वारा मात्र 1900 करोड़ के करेंसी नोट बैंकों को दिये गये हैं जबकि रद्द किए जा चुके 500 और 1000 के 13 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंकों में लोगों द्वारा जमा किये जा चुके हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि रिजर्व बैंक कितने नोट छाप पा रहा है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा से जुड़े मजदूरों का पेमेंट भी रुका हुआ है। राज्यों ने कैश की भारी कमी के चलते पेमेंट्स रुकने की जानकारी केंद्र सरकार को दी है।
शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि लोगों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। गुस्से से भरे लोग कह रहे हैं कि अब उन्हें कैश का नहीं बल्कि चुनाव का इंतजार है। लोग अब पूछने लगे हैं जिसके लिए नोटबंदी हुई वो पैसा कहां है?

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